चीन में पाकिस्तानी लड़कियों की शादी की ख़बर आने के बाद पाकिस्तान की फ़ेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफ़आईए) ने
क़रीब 20 लोगों को पाकिस्तानी लड़कियों को धोखा देकर चीन ले जाने के आरोप में गिरफ़्तार किया है.
इन लोगों की गिरफ़्तारी के बाद इस्लामाबाद, रावलपिंडी और लाहौर से कई महिलाओं के वापस आने की ख़बरें भी सामने आती रही हैं.लेकिन इस सारे मामले में शादी के झांसे में फंसने वाले लोगों के बारे में बहुत कम जानकारियां सार्वजनिक हुई हैं.
इसकी एक बड़ी वजह इन घटनाओं के सामने आने के बाद शर्मिंदगी के डर से लड़कियों के घर वाले इस पर बात नहीं करना चाहते.
इसी मुद्दे पर दो परिजनों ने बीबीसी से अपनी बेटियों के चीन जाने और देह व्यापार की ख़बरें जानने के बाद वापस आने तक के बारे में बात करने के लिए रज़ामंदी ज़ाहिर की.
साथ ही उन्होंने इस बात पर भी रोशनी डाली की इस पूरे घटनाक्रम में एक मां-बाप के रूप में उनकी क्या भूमिका रही और वह क्या कारण थे जिनकी वजह से उन्होंने अपनी बेटियों की शादी चीन में करने की हामी भरी.
लोगों की पहचान छिपाने की वजह से उनके नाम यहां बदल दिए गए हैं.
मेरा नाम समीना है और मैं लाहौर, महमूद बूटी चौक की रहने वाली हूं. यहां पर हमारे अलावा और भी ईसाई परिवार के लोग रहते हैं. मुझे जब बताया गया कि मेरी 19 साल की बेटी सकीना के लिए विदेश से रिश्ता आया है तो मैं बहुत हैरान हुई.
हम एक कमरे के मकान में रहते हैं. इसके पिता क्लीनर थे, उनकी मौत हो चुकी है और हमारा घर उनकी पेंशन (12000 रुपये) से और बेटी की कमाई (9000 रुपये) से चलता है. मेरी बेटी गार्मेंट फ़ैक्ट्री में काम करती है और वहीं उसकी दो दोस्तों ने उसे इस रिश्ते के बारे में बताया.
हम इतने ग़रीब लोगों पर कोई अचानक से इतना मेहरबान क्यों हो रहा है ये समझ नहीं आ रहा था.
ये पिछले साल की बात है. सकीना की दो दोस्त चंदा और सना हमारे घर आईं और कहा कि एक चीनी शख़्स अपने लिए अच्छे घर की लड़की तलाश कर रहा है और उनको आप का ख़ानदान पसंद आया है. तो मैंने कहा कि हम तो कहीं नहीं जाते तो फिर उन लोगों ने हमें कहां देखा?
मैंने यही बातें अपनी बेटी से कही और उनके पिता के एक रिश्तेदार से बातचीत भी की. मुझे शुरू ही से ये रिश्ता नहीं पसंद आ रहा था. लेकिन मेरी बेटी अपने भविष्य की ख़ातिर शादी करना चाहती थी.
उसकी बात सुनकर मुझे भी लगा कि मैंने उसे क्या दिया है अब तक? मेरी चार बेटियां और दो लड़के हैं और किसी ने भी शिक्षा हासिल नहीं की. हमारे पास कभी उतने पैसे नहीं रहे कि उनकी शिक्षा के बारे में सोचते.
और फिर अगर मेरी बेटी को एक मौक़ा मिल रहा था कि वह अपने लिए कुछ कर सके तो मैंने हां कर दी. हालांकि, मेरा दिल नहीं मान रहा था.
हमारे अपने लोगों की जल्दबाज़ी भी हमारे लिए नुक़सान की वजह बनी.
मुझे सकीना की दोनों दोस्तों ने कहा कि ज़्यादा सोचें नहीं अच्छे रिश्ते रोज़ नहीं आते और मैंने भी यही सोचा कि मैं इतना अच्छा रिश्ता नहीं ला सकती. लेकिन अब सोचती हूं कि इससे बेहतर था कि मेरी बेटी की शादी न होती, कम से कम इतनी बेइज़्ज़ती तो नहीं सहनी पड़ती.
हमने लड़के से मिलने को कहा लेकिन हमें कहा गया कि लड़का इस्लामाबाद में है, वहीं आकर देख लेना. मैंने इस बात पर शोर मचाया तो मुझे कहा गया कि काम की व्यस्तता की वजह से लाहौर नहीं आ सकते इसलिए बुरा मत मानें.
इन सब बातों में एक महीना लगा. इसके बाद कहा गया कि अपनी बेटी को इस्लामाबाद मेडिकल टेस्ट के लिए भेजो और वहीं पासपोर्ट भी बनवा लेंगे.
मैंने कहा मेरी बेटी बग़ैर शादी के कहीं नहीं जाएगी. फिर यहीं शादी हुई. ऐसा लगा हम अपने घर की शादी में मेहमान थे. सारा इंतज़ाम उन लोगों ने ख़ुद किया और ज़्यादा लोगों को बुलाने से भी मना किया.