Wednesday, October 30, 2019

सऊदी अरब क्यों रखना चाहता है भारत से दोस्ती

पिछले कुछ सालों में भारत और सबसे बड़े खाड़ी देश सऊदी अरब के बीच रिश्तों में कितना बड़ा बदलाव आया है इसकी एक झलक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस हफ़्ते सऊदी यात्रा में दिखी.
पिछले तीन साल में मोदी दूसरी बार सऊदी अरब गए हैं. साल 2016 में मोदी की पहली सऊदी यात्रा के दौरान सऊदी अरब के बादशाह सलमान ने उन्हें सऊदी अरब का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया था.
सऊदी की दूसरी यात्रा में मोदी को फ़्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव समिट में शामिल होने का मौक़ा मिला. इसे 'दावोस इन द डेज़र्ट' यानी रेगिस्तान में डावोस कहा जा रहा है.

कश्मीर पर भारत के साथ सऊदी

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अगुआई में ये समिट कराया जा रहा है. मोहम्मद बिन सलमान इसी साल फ़रवरी में भारत आए थे. भारत ने हाल ही में कश्मीर राज्य को संविधान की धारा 370 के तहत मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म कर दिया है.
पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर प
सऊदी अरब में मोदी ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की जमकर वकालत की. मोदी ने कहा कि भारत तेल और गैस के आधारभूत संरचना में 2024 तक 100 अरब डॉलर ख़र्च करने की योजना बना रहा है.
र उठाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ रहा है, ऐसे में मोदी की सऊदी अरब की यात्रा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
इस पैसे से भारत तेल रिफ़ायनरी में सुविधाओं को और बेहतर बनाने की कोशिश करेगा. मोदी के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था को अगले पाँच वर्षों में दोगुनी करने का लक्ष्य है और इसके लिए ऊर्जा की ज़रूरतों में और इज़ाफ़ा होगा.
मोदी ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि 'राजनीतिक स्थिरता, पूर्वानुमान योग्य नीति और विविधतापूर्ण बड़े बाज़ार के कारण आपका निवेश भारत में सबसे ज़्यादा लाभदायक होगा.'
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ने अगले कुछ वर्षों में आधारभूत ढांचे को मज़बूत करने के लिए 1.5 खरब डॉलर ख़र्च करने की योजना बनाई है. मोदी ने सऊदी की तेल कंपनी आरामको का उदाहरण देते हुए कहा कि आरामको महाराष्ट्र के रिफ़ायनरी प्रोजेक्ट में निवेश कर रही है जो कि एशिया की सबसे बड़ी रिफ़ायनरी कंपनी है और छह करोड़ टन तेल का उत्पादन करती है.
भारत और सऊदी अरब का व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ रहा है. लेकिन ये संबंध केवल ख़रीदार और विक्रेता वाला नहीं है. हालांकि ये भी सच है कि भारत और सऊदी अरब के व्यापारिक रिश्तों में ऊर्जा क्षेत्र ही सबसे महत्वपूर्ण है.
इराक़ के बाद सऊदी अरब भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है. सऊदी अरब अब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर बन गया है.
दोनों देशों के बीच साल 2017-18 में 27.48 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ. सऊदी अरब भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है. ये निवेश ऊर्जा, रिफ़ायनरी, पेट्रोकेमिकल्स, कृषि, और खनन के क्षेत्र में होगा. भारत और सऊदी अरब का रिश्ता धीरे-धीरे सामरिक होता जा रहा है जैसा कि मोदी ने रियाद में अपने भाषण में ख़ुद इसका ज़िक्र किया था.
मोदी की सऊदी यात्रा के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. पहला समझौता इंडियन स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड और सऊदी आरामको के बीच हुआ जिसके कारण सऊदी अरब कर्नाटक में तेल रिजर्व रखने का दूसरा प्लांट बनाने में अहम रोल अदा करेगा.
दूसरा समझौता भारत के इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के पश्चिमी एशिया यूनिट और सऊदी अरब की अल-जेरी कंपनी के बीच हुआ. मोदी ने इस दौरान इंडिया-सऊदी स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप काउंसिल के गठन की भी घोषणा की. इस काउंसिल में दोनों देशों का नेतृत्व शामिल होगा जो भारत को अपनी उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करेगा.
सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की संख्या सबसे ज़्यादा है. वहां 26 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं. पहले से उलट, भारत अब द्विपक्षीय बातचीत में दूसरे देशों में रह रहे अपने लोगों के मुद्दों और उनके फ़ायदों का पूरा इस्तेमाल करने में नहीं हिचकता है.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब में भारतीय समुदाय की 'कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता' का ख़ास तौर से ज़िक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्ते मज़बूत होंगे.
उन्होंने अपने भाषण के ज़रिए सऊदी में रह रहे भारतीयों तक पहुंचने की कोशिश की. पीएम मोदी ने कहा, "भारत आप पर गर्व करता है क्योंकि आपने सऊदी में अपनी जगह बनाई है. आपकी कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता ने हमारे द्विपक्षीय रिश्ते में मिठास लाने और इसे मज़बूत बनाने में मदद की है."
भारत जिस तरह सऊदी अरब से लगातार जुड़ा हुआ है, उसका फ़ायदा उसे राजनीतिक मोर्चे पर सऊदी की ओर से सकारात्मक रवैये के तौर पर मिला है. जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के भारत सरकार के फ़ैसले पर भी सऊदी की प्रक्रिया तुर्की और मलेशिया के उलट सकारात्मक रही. सऊदी अरब ने कश्मीर मुद्दे पर बढ़ते संकट को लेकर पाकिस्तान को चेताया था.
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ख़ुद रियाद दौरा किया था. पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ पांरपरिक रिश्ते भी रहे हैं लेकिन इन सबके बावजूद सऊदी ने यह संकेत दिया कि वो कश्मीर मुद्दे पर भारत की चिंताओं और संवेदनशीलता को समझता है.

Wednesday, October 16, 2019

لعبة فورتنايت تنطلق بخريطة جديدة في موسمها الحادي عشر

بعد أقل من يومين من حدوث اصطدام بنيزك ضخم داخل لعبة فورتنايت الموسم العاشر، وابتلاع ثقب أسود لخريطة اللعبة بالكامل، تعود اللعبة للظهور بعد تدشين موسمها الـ 11، أو ما يعرف بـ الفصل الثاني، وبدأ اللاعبون التكيف مع خريطة جديدة تماما للعبة، وتحديث طريقة اللعب.
كان بث اللعبة على الإنترنت قد توقف اعتبارا من مساء يوم الأحد، واستُبدل ببث مباشر لثقب أسود على صفحتها على موقع تويتر، مع نشر فيديو ترويجي للموسم الجديد للعبة.
بالنسبة لأولئك الذين لا يعرفون شيئا عن اللعبة، تسمح لعبة "فورتنايت" لما يصل إلى 100 لاعب للقتال بشكل فردي أو كجزء من فريق، ليكون آخر من يصمد في ساحة تلك المعركة الافتراضية هو الفائز.
بدأ العد التنازلي للعبة من خلال صاروخ أُطلق من منصة صواريخ "داستي بوت".
وشاهد اللاعبون الذين كانوا متصلين بالإنترنت أثناء حدث "النهاية" حدوث انفجار لنيزك داخل اللعبة بدا أنه يمحو خريطة فورتنايت بكاملها.
وسُحب هؤلاء اللاعبون إلى فجوة كبيرة، ثم ظهر على الشاشة أنها ثقب أسود في المنتصف.
واجتذب الفيديو الترويجي للموسم الجديد للعبة "فورتنايت الفصل 2" ما يزيد على 700 ألف مشاهدة خلال أقل من ساعتين على موقع تويتر.
تقاسمت مارغريت آتوود وبرناردين إيفاريستو جائزة بوكر لعام 2019 بعد أن قررت لجنة التحكيم خرق قواعد الجائزة بالإعلان عن حصول الكاتبتين على أصوات متساوية.
وحصلت آتوود على الجائزة عن روايتها "الوصايا"، التي جاءت كتتمة لروايتها "قصة خادمة" التي تحولت لمسلسل شهير، مناصفة مع رواية "فتاة، إمرأة، أخرى" للكاتبة اللندنية إيفاريستو.
وستتقاسم الكاتبتان بالتساوي قيمة الجائزة، التي تبلغ قيمتها 50 ألف جنيه استرليني.
وتنص قواعد الجائزة على أنها لا يجب أن تقسم، ولكن لجنة التحكيم قالت إنها "لا يمكنها فصل" العملين.
وآتوود، 79 عاما، تعد أكبر كاتب على الإطلاق سنا يحصل على الجائزة، بينما إيفاريستو أول امرأة سوداء تفوز بها.
وبعد الإعلان عن الفائزين، وقفت الكاتبتان ممسكتان بيد بعضهما البعض على خشبة المسرح. وقالت آتوود مازحة "أعتقد أنني مسنة، ولا أريد كل هذا القدر من الاهتمام، ولهذا أن سعيدة أنك حصلت على قدر منه".
وأضافت "كنت سأشعر بالحرج...لو كنت بمفردي هنا. ولهذا أنا سعيدة جدا لأنك هنا أيضا".
وبعد خمس ساعات من المداولات، قال بيتر فلورانس، رئيس لجنة التحكيم، "قررنا عدم الالتزام "بقواعد الجائزة".
وقال للصحفيين "كلما تحدثنا عنهما، كلما شعرنا أننا نحبهما الاثنين حتى أننا أردنا لكليهما أن تفوزا".
ومرت 19 عاما بعد أن فازت الكندية آتوود بالبوكر عن روايتها "القاتل الأعمى"، و33 عاما عن ترشيحها للجائزة عن "قصة خادمة".
ومع رواج "قصة خادمة" مؤخرا بعد تحولها لمسلسل شهير، وعلى خلفية ما يجري في الولايات المتحدة في عهد الرئيس الأمريكي دونالد ترامب، قررت آتوود كتابة رواية تأتي كمتابعة لأحداث "قصة خادمة"، وتبدأ أحداثها بعد 15 عاما من نهايتها.
وتعود الرواية إلى دولة "جلعاد" السلطوية الذكورية، وتروي أحداثها العمة ليديا، إحدى معلمات "الخادمات" في جلعاد، وفتاتان في سن المراهقة.
وبيع من "الوصايا"، التي نشرت في سبتمبر/أيلول الماضي، مئة الف نسخة في بريطانيا في الأسبوع الأول لطرحها في المكتبات، لتصبح أسرع رواية ذات طبعة فاخرة من حيث المبيعات منذ أربعة أعوام.
ورواية "فتاة، إمرأة، أخرى" هي ثامن رواية لإيفاريستو. وتضم الرواية 12 فصلا، وتضم 12 شخصية، تكرس لكل منها فصلا، ومعظم الشخصيات نساء بريطانيات من أصول افريقية.
وقالت إيفاريستو "نحن النساء البريطانيات السود نعلم أننا إذا لم نكتب عن أنفسنا أدبا، لن يقوم غيرنا بذلك".

Monday, October 7, 2019

भारतीय सैनिकों ने पूर्वी पाकिस्तान को मुक्त कराने का अभियान शुरू किया

इस बार हमले की कमान थी हंटर उड़ा रहे विंग कमांडर एसके कौल और फ़्लाइंग ऑफ़िसर हरीश मसंद के पास. कौल ने जो बाद में वायु सेना अध्यक्ष बने, बीबीसी को बताया, "हमें ये ही नहीं पता था कि ढाका में ये गवर्मेन्ट हाउस कहाँ था. ढाका कलकत्ता और बंबई की तरह बड़ा शहर था. हमें ढाका शहर का बर्मा शेल का एक पुराना रोडमैप दिया गय़ा था. उससे हमें ज़बरदस्त मदद मिली.''
कौल की अगुवाई में दल ने इसका भी ध्यान रखा कि हमले में आस-पड़ोस की आबादी का ज़्यादा नुक़सान नहीं हो पाए.
उन्होंने बताया, "हमने पहले बिल्डिंग को पास किया ताकि आसपास खड़े लोग तितर-बितर हो जाएं और उन्हें नुक़सान न पहुंचे. हमने रॉकेट अटैक के साथ-साथ गन अटैक भी किए और अपने अटैक को हाइट पर रखा ताकि हम उनके छोटे हथियारों की पहुँच से बाहर रह सकें."
विंग कमांडर कौल के साथ गए उनके विंग मैन फ़्लाइंग ऑफ़िसर हरीश मसंद ने भी बीबीसी के बताया, "मुझे याद है गवर्मेन्ट हाउस के सामने पहली मंज़िल पर एक बड़ा दरवाज़ा या खिड़की सरीखी चीज़ थी. उस पर हमने ये सोच कर निशाना लगाया कि वहाँ कोई मीटिंग हॉल हो सकता है. हमले के बाद जब हम लोग नीचे उड़ते हुए इंटरकॉन्टिनेंटल होटल के बगल से गुज़र रहे थे तो हमने देखा कि उसकी छत, टैरेस और बालकनी पर बहुत से लोग इस नज़ारे को देख रहे थे."
उधर गवर्नर हाउस में मौजूद गाविन यंग ने वायर पर संवाद लिखा, "भारतीय जेटों ने गरजते हुए हमला किया. धरती फटी और हिली भी. मलिक के मुंह से निकला-अब हम भी शरणार्थी हैं. केली ने मेरी तरफ़ देखा मानो बिना बोले पूछ रहे हों आख़िर हमें यहाँ दोबारा आने की ज़रूरत क्या थी. अचानक मलिक ने एक पेन निकाला और कांपते हाथों से एक काग़ज़ पर कुछ लिखा. केली और मैंने देखा कि ये मलिक का इस्तीफ़ा था जिसे उन्होंने राष्ट्रपति याहया ख़ाँ को संबोधित किया था."
"अभी हमला जारी ही था कि मलिक ने अपने जूते और मोज़े उतारे, बग़ल के गुसलखाने में अपने हाथ पैर धोए, रूमाल से अपना सिर ढका और बंकर के एक कोने में नमाज़ पढ़ने लगे. ये गवर्मेंट हाउस का अंत था. ये पूर्वी पाकिस्तान की आख़िरी सरकार का भी अंत था."( गाविन यंग, वर्लड्स अपार्ट, ट्रेवेल्स इन वार एंड पीस)
इस हमले के तुरंत बाद गवर्नर मलिक ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ इंटरकॉन्टिनेंटल होटल का रुख़ किया. इस हमले ने युद्ध के समय को तो कम किया ही और दूसरे विश्व युद्ध में बर्लिन की तरह गली गली में लड़ने की नौबत भी नहीं आई.
दो दिन बाद ही पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाल दिए और एक मुक्त देश के तौर पर बांग्लादेश के अभ्युदय का रास्ता साफ़ हो गया. इस युद्ध में असाधारण वीरता दिखाने के लिए विंग कमांडर एसके कौल को महावीर चक्र और विंग कमांडर बीके बिश्नोई और हरीश मसंद को वीर चक्र प्रदान किए गए.
अंजू, अक्सर मुझे आते-जाते मिल जाती है. होठों पर लिपिस्टिक, माथे पर बिंदी लगाए, हाथों में चूड़ियां पहने और हमेशा मुस्कराते हुए.
लिफ़्ट में या सोसाइटी के गेट पर जब भी वो मुझसे टकराती है तो मैं उसका हालचाल पूछ लेती हूं.
उसे कभी-कभी मैं घर के काम में मदद के लिए बुलाती रही हूं. हर बार की तरह जब एक दिन मैंने उससे हाल चाल पूछा तो मुस्कुरा कर उसने कहा, तबीयत ठीक नहीं.
फिर बोली, मेरा बस रोने का मन करता है. पिछले मंगलवार बस रोती रही.
ये सब बातें वो बड़ी तेज़ी से चेहरे पर मुस्कुराहट लिए अपने अवधी अंदाज में बोल गई. ऐसी बात उसने मुझे पहले भी कही थी.
क्या अंजू का बार-बार इस बात को कहना कि मेरा सिर्फ़ रोने का मन करता है, किसी समस्या की ओर इशारा करता है?
क्या निम्न मध्यमवर्ग से आने वाली अंजू या उसका परिवार ये समझ पाएगा कि उसे किसी डॉक्टरी मदद की ज़रूरत है?
क्या अंजू जैसी मानसिक स्थिति में है, उसे ही कॉमन मेंटल डिस्ऑर्डर माना जाता है?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (निम्हंस) ने 2016 में देश के 12 राज्यों में एक सर्वेक्षण करवाया था. इसके बाद कई चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं.
आंकड़ों के मुताबिक आबादी का 2.7 फ़ीसदी हिस्सा डिप्रेशन जैसे कॉमन मेंटल डिस्ऑर्डर से ग्रसित है.
जबकि 5.2 प्रतिशत आबादी कभी न कभी इस तरह की समस्या से ग्रसित हुई है.
इसी सर्वेक्षण से एक अंदाजा ये भी निकाला गया कि भारत के 15 करोड़ लोगों को किसी न किसी मानसिक समस्या की वजह से तत्काल डॉक्टरी मदद की ज़रूरत है.
साइंस मेडिकल जर्नल लैनसेट की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10 ज़रूरतमंद लोगों में से सिर्फ़ एक व्यक्ति को डॉक्टरी मदद मिलती है.
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में मानसिक समस्या से ग्रसित लोगों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है. और आने वाले दस सालों में दुनिया भर के मानसिक समस्याओं से ग्रसित लोगों की एक तिहाई संख्या भारतीयों की हो सकती है.
जानकार ये आशंका जताते हैं कि भारत में बड़े स्तर पर बदलाव हो रहे हैं. शहर फैल रहे हैं, आधुनिक सुविधाएं बढ़ रही हैं. बड़ी संख्या में लोगों का गांवों से पलायन हो रहा है. इन सब का असर लोगों के मन मस्तिष्क पर भी पड़ सकता है. लिहाज़ा डिप्रेशन जैसी समस्या के बढ़ने की आशंका है.
दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज़ (इब्हास) के निदेशक डॉक्टर निमीश देसाई का कहना है, "भारत में परिवारों का टूटना, स्वायत्ता पर ज़ोर और टेक्नॉलॉजी जैसे मुद्दे लोगों को डिप्रेशन की ओर धकेल रहे हैं क्योंकि समाज पाश्चात्यकरण की ओर टॉप फाइव गियर में बढ़ रहा है, ये बीसवीं सदी का पोस्ट वर्ल्ड वार का सोशल टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट का मॉडल है. यहां सवाल ये उठता है कि क्या गुड डेवलपमेंट ज़रूरी है या गुड मेंटल हेल्थ ज़रूरी है?"
डॉक्टर निमीश हालांकि इसे लेकर आश्वस्त भी हैं कि लोगों में अब मेंटल हेल्थ की अहमियत की समझ पैदा होने लगी है लेकिन वे यह भी मानते हैं कि समाज का एक तबका इस पर खुल कर बातें करना पसंद नहीं करता और इसे एक टैबू के तौर पर लेता है.
2015 में हिंदी फ़िल्मों की अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने एक न्यूज़ चैनल के इंटरव्यू में बताया था कि वे डिप्रेशन की शिकार हुई थीं. उन्हें अभिनय के लिए काफी प्रशंसा मिल रही थी, अवार्ड्स मिल रहे थे लेकिन एक सुबह उन्हें लगा कि उनका जीवन दिशाहीन है, वे लो फील करती थीं और बात-बात पर रो पड़ती थीं.