न्यूयॉर्क. पीएन
बी घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी की
मुश्किल और बढ़ सकती है। गुरुवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त
राष्ट्र में एंटीगुआ और बारबुडा के विदेश मंत्री ईपी चेत ग्रीन से चौकसी के
प्रत्यर्पण को लेकर बात की। ग्रीन ने भरोसा दिलाया कि वे हरसंभव मदद
करेंगे। चौकसी इस समय एंटीगुआ में ही है।
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न्यूज एजेंसी ने विदेश मंत्रालय के सूत्रों के
हवाले से बताया, ग्रीन को सुषमा स्वराज यह समझाने में कामयाब रहीं कि चौकसी
भारत में बहुत बड़ा घोटाला करके भागा है। एंटीगुआ और भारत के बीच
प्रत्यर्पण संधि हो चुकी है। इसकी मदद से चौकसी को वापस लाने की कोशिश की
जा रही है।
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चौकसी के एंटीगुआ में होने की पुष्टि के बाद
भारतीय एजेंसियां उस तक पहुंचने के लिए हर विकल्प पर काम कर रही हैं। कुछ
समय पहले एंटीगुआ सरकार ने बताया था कि भारत से पुलिस क्लियरेंस मिलने के
बाद ही भगोड़े कारोबारी को एंटीगुआ की नागरिकता दी गई।
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एंटीगुआ सरकार के मुताबिक, मई 2017 में चौकसी ने
नागरिकता के लिए आवेदन किया था। उसने जरूरी कागजात भी जमा किए थे। इनमें
एंटीगुआ और बारबुडा सिटिजनशिप बाई इन्वेस्टमेंट एक्ट 2013 के सेक्शन
5(2)(b) के तहत जरूरी भारतीय पुलिस का क्लियरेंस सर्टिफिकेट भी शामिल था।
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कई देशों के मंत्रियों से मिलीं सुषमा
ग्रीन के अलावा सुषमा ने बोलिविया, अर्मेनिया, ऑस्ट्रिया, पनामा, जर्मनी और चिली
के विदेश मंत्रियों या उनके समकक्षों से भी मुलाकात की। पाक के अनुरोध के
बाद सुषमा और पाकिस्तान के विदेश मंत्री की मुलाकात तय हुई थी।
जम्मू-कश्मीर में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद यह मीटिंग रद्द कर दी
गई। रीनगर. सुरक्षा बलों ने बुधवार को सोपोर में मुठभेड़
के दौरान दो आतंकियों को मार गिराया। इनमें से एक लश्कर-ए-तैयबा का टॉप
कमांडर अबु माज है। माज फरवरी 2017 में आर्मी की टुकड़ी पर हुए हमले में
शामिल था। इस हमले में मेजर सतीश दहिया शहीद हुए थे। मेजर दहिया सर्जिकल
स्ट्राइक में भी शामिल थे।
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माज के अलावा अब्दुल मजीद उर्फ समीर को भी सुरक्षा बलों ने मार गिराया। वह सोपोर के बोमई का रहने वाला था।
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पिछले 12 दिनों में सुरक्षा बलों की कई बार आतंकियों से मुठभेड़ हुई। इस दौरान 18 दहशतगर्द ढेर किए गए।
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सोपोर के तुज्जेर में आतंकियों के छिपे होने की
सूचना मिली थी। इसके बाद पैरामिलिट्री फोर्स और सेना के जवानों ने एक
ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मार गिराए।
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सेना के अफसर ने बताया कि एनकाउंटर के बाद मिले
सबूतों से पता चला कि मारा गया आतंकी लश्कर का कमांडर अबु माज है। वह
उत्तरी कश्मीर में 2015 से एक्टिव था और लश्कर के सबसे पुराने कमांडरों में
से एक था।
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फरवरी 2017 में आर्मी की टुकड़ी पर हमले के
दौरान अबु माज भागने में कामयाब हो गया था। उस मुठभेड़ में जवानों ने अबु
साद, अबु माविया और अबु दर्डा को मार गिराया । ई दिल्ली. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकियों
को फंडिंग मुहैया कराने वाले एक टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस
सिलसिले में दिल्ली से तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। अधिकारियों के
मुताबिक, पकड़े गए लोगों का संबंध आतंकी हाफिज सईद के फलाह-ए-इंसानियत
फाउंडेशन (एफआईएफ) से था। एनआईए ने इस सिलसिले में मंगलवार को दिल्ली के
दरियागंज, निजामुद्दीन और कूचा घासीराम में छापे मारे थे।
जमात-उद-दावा का विंग है फलाह-ए-इंसानियत
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टेरर फंडिंग मॉड्यूल की जांच के लिए एजेंसी ने
इसी साल जुलाई में एक एफआईआर दर्ज की थी। इसमें कहा गया था कि दिल्ली स्थित
कुछ लोग सईद के संगठन से जुड़े लोगों से पैसा ले रहे हैं और उन्हें देश
में आतंक फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
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जांच में सामने आया कि दिल्ली के निजामुद्दीन
में रहने वाला मोहम्मद सलमान लगातार दुबई में रहकर फलाह-ए-इंसानियत के लिए
काम करने वाले एक पाकिस्तानी के संपर्क में था।
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एनआईए की ओर से जारी बयान में कहा गया- “आरोपी
एफआईएफ से जुड़े लोगों से हवाला के जरिए लंबे समय से फंड जुटा रहा था। भारत
में अशांति फैलाने के लिए हाफिज के संगठन से जुड़े लोग पाकिस्तान, संयुक्त
अरब अमीरात समेत कई देशों से पैसे भेज रहे हैं। उनका मकसद देश में आतंकी
गतिविधियों को बढ़ावा देना है।”
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एनआईए
ने 25 सितंबर को मोहम्मद सलमान के निजामुद्दीन स्थित घर, दरियागंज में
रहने वाले मोहम्मद सलीम और कूचा घासीराम में रहने वाले राजाराम के घर पर
छापा मारकर 1.56 करोड़ रु. की भारतीय और 43 हजार नेपाली करंसी जब्त की।
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इसके अलावा 14 मोबाइल फोन, 5 पेन ड्राइव और कुछ
दस्तावेज भी बरामद किए गए। इस मामले में मोहम्मद सलमान, मोहम्मद सलीम के
साथ जम्मू कश्मीर के रहने वाले सज्जाद अब्दुल वानी को गिरफ्तार किया।
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फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन की स्थापना 1990 में
हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा ने ही की थी। इसका मुख्यालय लाहौर में है।
सईद को अमेरिका अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर चुका है। उस पर ईनाम भी
घोषित है। खास बात ये है कि फलाह-ए-इंसानियत को भी अमेरिका ने 2010 में
आतंकी संगठन घोषित कर दिया था।
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